कुरान - 11:50 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

50
وَإِلَىٰ عَادٍ أَخَاهُمۡ هُودٗاۚ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥٓۖ إِنۡ أَنتُمۡ إِلَّا مُفۡتَرُونَ

Transliteration: (Wa ilaa 'aadin akhaahum Hoodaa; qaala yaa qawmi' budul laaha maa lakum min ilaahin ghairuhooo in antum illaa muftaroon)

और क़ौमे आद की तरफ़ उनके भाई हूद को भेजा [107]। उन्होंने कहा, 'ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो [108]। उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं। तुम तो सिर्फ़ झूठ गढ़ने वाले हो।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 50 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 50 की तफ़्सीर

✅ [107] बिरादराना रिश्ता

'भाई' से मुराद नसब और क़ौमी रिश्ता है कि हज़रत हूद (अलै.) उसी क़बीले और नस्ल से ताल्लुक़ रखते थे ताकि वे उनकी सच्चाई और अमानत को अच्छी तरह पहचानते हों।

✅ [108] तौहीद की दावत

हज़रत हूद (अलै.) ने अपनी क़ौम को बुतपरस्ती छोड़कर ख़ालिस अल्लाह की इबादत करने की दावत दी और बताया कि जिन बुतों को वे माबूद समझते हैं वे उनके अपने गढ़े हुए हैं।

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