कुरान - 11:49 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

49
تِلۡكَ مِنۡ أَنۢبَآءِ ٱلۡغَيۡبِ نُوحِيهَآ إِلَيۡكَۖ مَا كُنتَ تَعۡلَمُهَآ أَنتَ وَلَا قَوۡمُكَ مِن قَبۡلِ هَٰذَاۖ فَٱصۡبِرۡۖ إِنَّ ٱلۡعَٰقِبَةَ لِلۡمُتَّقِينَ

Transliteration: (Tilka min ambaaa'il ghaibi nooheehaaa ilaika maa kunta ta'lamuhaaaa anta wa laa qawmuka min qabli haazaa fasbir innal 'aaqibata lilmuttaqeen)

ये ग़ैब की ख़बरें हैं जिन्हें हम आपकी तरफ़ वह्य करते हैं। इनसे पहले न आप इन्हें जानते थे और न आपकी क़ौम [105]। पस आप सब्र कीजिए। बेशक अच्छा अंजाम परहेज़गारों ही के लिए है [106]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 49 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 49 की तफ़्सीर

✅ [105] इल्मे ग़ैब: वह्य की रौशनी में

हज़रत नूह (अलै.) का यह मुफ़स्सल वाक़िआ सदियों पुराना था जिसे अरब के लोग नहीं जानते थे। नबी करीम ﷺ को अल्लाह ने वह्य के ज़रिए इन ग़ैबी हक़ायक़ से बाख़बर फ़रमाया, जो आपकी सच्ची नुबुव्वत की रौशन दलील है।

✅ [106] सब्र और मुत्तक़ियों की कामयाबी

अल्लाह ने नबी करीम ﷺ को तसल्ली दी कि जैसे नूह (अलै.) की क़ौम हलाक हुई और नूह (अलै.) कामयाब हुए, वैसे ही मक्का के मुशरिकीन ज़लील होंगे और बिल-आख़िर फ़तह आप और आपके मोमिन साथियों की होगी।

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