कुरान - 11:47 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

47
قَالَ رَبِّ إِنِّيٓ أَعُوذُ بِكَ أَنۡ أَسۡـَٔلَكَ مَا لَيۡسَ لِي بِهِۦ عِلۡمٞۖ وَإِلَّا تَغۡفِرۡ لِي وَتَرۡحَمۡنِيٓ أَكُن مِّنَ ٱلۡخَٰسِرِينَ

Transliteration: (Qaala rabbi inneee a'oozu bika an as'alaka maa laisa lee bihee 'ilmunw wa illaa taghfir lee wa tarhamneee akum minal khaasireen)

नूह ने अर्ज़ की, 'ऐ मेरे रब! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ इस बात से कि तुझसे वह सवाल करूँ जिसका मुझे इल्म नहीं। और अगर तू मुझे न बख़्शे और मुझ पर रहम न फ़रमाए, तो मैं नुक़सान उठाने वालों में से हो जाऊँगा' [101]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 47 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 47 की तफ़्सीर

✅ [101] आजिज़ी और इस्तिग़फ़ार का आला नमूना

हज़रत नूह (अलै.) ने फ़ौरन अल्लाह की बारगाह में तौबा व आजिज़ी का इज़हार किया। यह पैग़म्बराना शान है कि वे अपने हर अमल को अल्लाह के करम का मोहताज समझते हैं।

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