कुरान - 11:46 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

46
قَالَ يَٰنُوحُ إِنَّهُۥ لَيۡسَ مِنۡ أَهۡلِكَۖ إِنَّهُۥ عَمَلٌ غَيۡرُ صَٰلِحٖۖ فَلَا تَسۡـَٔلۡنِ مَا لَيۡسَ لَكَ بِهِۦ عِلۡمٌۖ إِنِّيٓ أَعِظُكَ أَن تَكُونَ مِنَ ٱلۡجَٰهِلِينَ

Transliteration: (Qaala yaa Noohu innahoo laisa min ahlika innahoo 'amalun ghairu saalihin falaa tas'alni maa laisa laka bihee 'ilmun inneee a'izuka an takoona minal jaahileen)

अल्लाह ने फ़रमाया, 'ऐ नूह! बेशक वह तेरे घर वालों में से नहीं है [97]; बेशक उसके आमाल अच्छे नहीं हैं [98]। पस तू मुझसे उस चीज़ का सवाल न कर जिसका तुझे इल्म नहीं [99]। मैं तुझे नसीहत करता हूँ ताकि तू नादानों में से न हो जाए' [100]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 46 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 46 की तफ़्सीर

✅ [97] ईमान ही हक़ीक़ी रिश्ता है

अल्लाह तआला ने वाज़ेह फ़रमा दिया कि अम्बिया का हक़ीक़ी ख़ानदान जिस्मानी नस्ल से नहीं बल्कि ईमान और अक़ीदे से बनता है। जो काफ़िर है, वह नबी का अहल नहीं हो सकता।

✅ [98] बुरे आमाल और नाफ़रमानी

कनआन का अमल बदतरीन था क्योंकि उसने कुफ़्र इख़्तियार किया और नबी की दावत को ठुकरा दिया।

✅ [99] ला-इल्मी में सवाल से परहेज़

अल्लाह ने नूह (अलै.) को तालीम दी कि जिसके बातिन का हाल मालूम न हो, उसके हक़ में दुआ न की जाए।

✅ [100] मुक़र्रबीन को ख़ास नसीहत

अल्लाह तआला अपने प्यारे नबियों को छोटी सी लग़्ज़िश पर भी कमाल की तरफ़ रहनुमाई फ़रमाता है ताकि उनका मक़ाम सबसे बुलंद रहे।

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