कुरान - 11:44 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

44
وَقِيلَ يَـٰٓأَرۡضُ ٱبۡلَعِي مَآءَكِ وَيَٰسَمَآءُ أَقۡلِعِي وَغِيضَ ٱلۡمَآءُ وَقُضِيَ ٱلۡأَمۡرُ وَٱسۡتَوَتۡ عَلَى ٱلۡجُودِيِّۖ وَقِيلَ بُعۡدٗا لِّلۡقَوۡمِ ٱلظَّـٰلِمِينَ

Transliteration: (Wa qeela yaaa ardubla'ee maaa'aki wa yaa samaaa'u aqli'ee wa gheedal maaa'u wa qudiyal amru wastawat 'alal joodiyyi wa qeela bu'dal lilqawmiz zaalimeen)

और हुक्म दिया गया, 'ऐ ज़मीन! अपना पानी निगल जा, और ऐ आसमान! थम जा।' और पानी सुखा दिया गया और काम तमाम कर दिया गया। और किश्ती जूदी पहाड़ पर ठहर गई [94], और कह दिया गया, 'दूर हों ज़ालिम लोग!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 44 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 44 की तफ़्सीर

✅ [94] जूदी पहाड़ पर किश्ती का लंगरअंदाज़ होना

अल्लाह के एक हुक्म से आसमान ने बारिश रोक दी और ज़मीन ने पानी जज़्ब कर लिया। हज़रत नूह (अलै.) की किश्ती कोहे जूदी (अरारत/मौसुल के पास) पर सलामती से टिक गई। यह अज़ीम दिन १० मुहर्रमुल हराम (आशूरा) का था जिसमें अहले ईमान को नजात मिली और ज़ालिमों की नस्ल मिटा दी गई।

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