Transliteration: (Wa hiya tajree bihim fee mawjin kaljibaali wa naadaa Noohunib nahoo wa kaana fee ma'ziliny yaa bunai yarkam ma'anaa wa laa takum ma'al kaafireen)
तूफ़ान इतना शदीद था कि पानी की लहरें बुलंद पहाड़ों की तरह उठ रही थीं। ऐसी ख़ौफ़नाक मौजों के बीच किश्ती का सलामत तैरना अल्लाह का खुला मोजिज़ा था।
हज़रत नूह (अलै.) ने अपने बेटे (कनआन) को शफ़क़त से पुकारा कि वह किश्ती में सवार होकर ईमान वालों की जमाअत में शामिल हो जाए।
यह आयत बताती है कि नबी की औलाद होना भी उस वक़्त तक नजात नहीं दिला सकता जब तक कि इंसान ख़ुद ईमान न लाए। काफ़िरों की सोहबत इंसान को हलाकत के गढ़े में धकेल देती है।
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