कुरान - 11:42 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

42
وَهِيَ تَجۡرِي بِهِمۡ فِي مَوۡجٖ كَٱلۡجِبَالِ وَنَادَىٰ نُوحٌ ٱبۡنَهُۥ وَكَانَ فِي مَعۡزِلٖ يَٰبُنَيَّ ٱرۡكَب مَّعَنَا وَلَا تَكُن مَّعَ ٱلۡكَٰفِرِينَ

Transliteration: (Wa hiya tajree bihim fee mawjin kaljibaali wa naadaa Noohunib nahoo wa kaana fee ma'ziliny yaa bunai yarkam ma'anaa wa laa takum ma'al kaafireen)

और वह किश्ती उन्हें पहाड़ों जैसी मौजों के दरमियान लिए तैर रही थी [89]। और नूह ने अपने बेटे को पुकारा [90] जो उनसे अलग-थलग था, 'ऐ मेरे प्यारे बेटे! हमारे साथ सवार हो जा और काफ़िरों के साथ न रह' [91]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 42 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 42 की तफ़्सीर

✅ [89] पहाड़ों जैसी मौजें

तूफ़ान इतना शदीद था कि पानी की लहरें बुलंद पहाड़ों की तरह उठ रही थीं। ऐसी ख़ौफ़नाक मौजों के बीच किश्ती का सलामत तैरना अल्लाह का खुला मोजिज़ा था।

✅ [90] नूह (अलै.) की अपने बेटे को पुकार

हज़रत नूह (अलै.) ने अपने बेटे (कनआन) को शफ़क़त से पुकारा कि वह किश्ती में सवार होकर ईमान वालों की जमाअत में शामिल हो जाए।

✅ [91] ईमान या कुफ़्र का इंतिख़ाब

यह आयत बताती है कि नबी की औलाद होना भी उस वक़्त तक नजात नहीं दिला सकता जब तक कि इंसान ख़ुद ईमान न लाए। काफ़िरों की सोहबत इंसान को हलाकत के गढ़े में धकेल देती है।

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