कुरान - 11:40 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

40
حَتَّىٰٓ إِذَا جَآءَ أَمۡرُنَا وَفَارَ ٱلتَّنُّورُ قُلۡنَا ٱحۡمِلۡ فِيهَا مِن كُلّٖ زَوۡجَيۡنِ ٱثۡنَيۡنِ وَأَهۡلَكَ إِلَّا مَن سَبَقَ عَلَيۡهِ ٱلۡقَوۡلُ وَمَنۡ ءَامَنَۚ وَمَآ ءَامَنَ مَعَهُۥٓ إِلَّا قَلِيلٞ

Transliteration: (Hattaaa izaa jaaa'a amrunaa wa faarat tannooru qulnah mil feehaa min kullin zawjainis naini wa ahlaka illaa man sabaqa 'alaihil qawlu wa man aaman; wa maaa aamana ma'ahooo illaa qaleel)

यहाँ तक कि जब हमारा हुक्म आ पहुंचा और तन्नूर (चूल्हा) उबल पड़ा [85], तो हमने फ़रमाया, 'किश्ती में हर क़िस्म के जानदारों में से नर और मादा का एक-एक जोड़ा सवार करा लो [86], और अपने घर वालों को भी, सिवाय उसके जिस पर पहले ही बात तय हो चुकी है [87], और उन लोगों को जो ईमान लाए हैं।' और उनके साथ ईमान लाने वाले बहुत थोड़े ही थे। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 40 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 40 की तफ़्सीर

✅ [85] तन्नूर का उबलना: तूफ़ान की निशानी

तन्नूर यानी पत्थर का वह तंदूर या ज़मीनी चश्मा जहां से क़ुदरती तौर पर पानी का फ़व्वारा उबल पड़ा। यह अज़ाब के शुरू होने और ज़मीन व आसमान से पानी के उबलने की मुक़र्ररा निशानी थी।

✅ [86] हर मख़लूक़ का जोड़ा

हज़रत नूह (अलै.) को हुक्म हुआ कि हर मुफ़ीद जानवर और परिंदे का एक-एक जोड़ा किश्ती में रख लें ताकि तूफ़ान के बाद ज़मीन पर ज़िंदगी का सिलसिला बाक़ी रहे।

✅ [87] अहले ख़ाना और मुस्तस्ना अफ़राद

घर वालों में नूह (अलै.) की काफ़िरा बीवी (वाग़िला) और नाफ़रमान बेटा (कनआन) शामिल नहीं थे क्योंकि वे काफ़िर थे; ईमान ही हक़ीक़ी रिश्ते की बुनियाद है।

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