Transliteration: (Hattaaa izaa jaaa'a amrunaa wa faarat tannooru qulnah mil feehaa min kullin zawjainis naini wa ahlaka illaa man sabaqa 'alaihil qawlu wa man aaman; wa maaa aamana ma'ahooo illaa qaleel)
तन्नूर यानी पत्थर का वह तंदूर या ज़मीनी चश्मा जहां से क़ुदरती तौर पर पानी का फ़व्वारा उबल पड़ा। यह अज़ाब के शुरू होने और ज़मीन व आसमान से पानी के उबलने की मुक़र्ररा निशानी थी।
हज़रत नूह (अलै.) को हुक्म हुआ कि हर मुफ़ीद जानवर और परिंदे का एक-एक जोड़ा किश्ती में रख लें ताकि तूफ़ान के बाद ज़मीन पर ज़िंदगी का सिलसिला बाक़ी रहे।
घर वालों में नूह (अलै.) की काफ़िरा बीवी (वाग़िला) और नाफ़रमान बेटा (कनआन) शामिल नहीं थे क्योंकि वे काफ़िर थे; ईमान ही हक़ीक़ी रिश्ते की बुनियाद है।
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