कुरान - 11:41 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

41
۞وَقَالَ ٱرۡكَبُواْ فِيهَا بِسۡمِ ٱللَّهِ مَجۡرٜىٰهَا وَمُرۡسَىٰهَآۚ إِنَّ رَبِّي لَغَفُورٞ رَّحِيمٞ

Transliteration: (Wa qaalar kaboo feehaa bismil laahi majraihaa wa mursaahaa; inna Rabbee la Ghafoorur Raheem)

और नूह ने कहा, 'इसमें सवार हो जाओ; अल्लाह ही के नाम से इसका चलना और इसका ठहरना है [88]। बेशक मेरा रब बड़ा बख़्शने वाला, निहायत रहम फ़रमाने वाला है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 41 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 41 की तफ़्सीर

✅ [88] बिस्मिल्लाह की बरकत और किश्ती की रवानगी

जब हज़रत नूह (अलै.) किश्ती को चलाना चाहते तो 'बिस्मिल्लाहि मज्रेहा' पढ़ते और जब उसे रोकना चाहते तो 'बिस्मिल्लाहि मुरसाहा' पढ़ते। इससे मालूम होता है कि हर अहम काम—ख़ास तौर पर सफ़र और सवारी—की शुरुआत अल्लाह के पाक नाम से करनी चाहिए। बिस्मिल्लाह हर बला और तूफ़ान से हिफ़ाज़त का अज़ीम ज़रिया है।

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