Transliteration: (Wa qaalar kaboo feehaa bismil laahi majraihaa wa mursaahaa; inna Rabbee la Ghafoorur Raheem)
जब हज़रत नूह (अलै.) किश्ती को चलाना चाहते तो 'बिस्मिल्लाहि मज्रेहा' पढ़ते और जब उसे रोकना चाहते तो 'बिस्मिल्लाहि मुरसाहा' पढ़ते। इससे मालूम होता है कि हर अहम काम—ख़ास तौर पर सफ़र और सवारी—की शुरुआत अल्लाह के पाक नाम से करनी चाहिए। बिस्मिल्लाह हर बला और तूफ़ान से हिफ़ाज़त का अज़ीम ज़रिया है।
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