कुरान - 11:57 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

57
فَإِن تَوَلَّوۡاْ فَقَدۡ أَبۡلَغۡتُكُم مَّآ أُرۡسِلۡتُ بِهِۦٓ إِلَيۡكُمۡۚ وَيَسۡتَخۡلِفُ رَبِّي قَوۡمًا غَيۡرَكُمۡ وَلَا تَضُرُّونَهُۥ شَيۡـًٔاۚ إِنَّ رَبِّي عَلَىٰ كُلِّ شَيۡءٍ حَفِيظٞ

Transliteration: (Fa in tawallaw faqad ablaghtukum maaa ursiltu biheee ilaikum; wa yastakhlifu Rabbee qawman ghairakum wa laa tadur roonahoo shai'aa; inna Rabbee 'alaa kulli shai'in Hafeez)

'फिर अगर तुम मुंह मोड़ते हो तो मैंने तुम्हें वह पैग़ाम पहुंचा दिया है जिसके साथ मैं भेजा गया था [119]। और मेरा रब तुम्हारे बदले किसी दूसरी क़ौम को तुम्हारी जगह ले आएगा [120], और तुम उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकोगे। बेशक मेरा रब हर चीज़ पर निगहबान है।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 57 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 57 की तफ़्सीर

✅ [119] हक़ की तबलीग़ मुकम्मल

नबी ने फ़रमाया कि मेरा फ़र्ज़ पैग़ाम पहुंचाना था जो मैंने पूरा कर दिया, अब अगर तुम मुंह मोड़ोगे तो अज़ाब के ख़ुद ज़िम्मेदार होगे।

✅ [120] नाफ़रमानों की जगह दूसरी क़ौम

अल्लाह तुम्हारी ताक़त का मोहताज नहीं; वह तुम्हें हलाक करके किसी दूसरी फ़रमांबरदार क़ौम को आबाद कर देगा।

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