कुरान - 11:59 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

59
وَتِلۡكَ عَادٞۖ جَحَدُواْ بِـَٔايَٰتِ رَبِّهِمۡ وَعَصَوۡاْ رُسُلَهُۥ وَٱتَّبَعُوٓاْ أَمۡرَ كُلِّ جَبَّارٍ عَنِيدٖ

Transliteration: (Wa tilka 'aad, jahadoo bi Aayaati Rabbihim wa 'asaw Rusulahoo wattaba'ooo amra kulli jabbaarin 'aneed)

और यह थी क़ौमे आद। उन्होंने अपने रब की आयतों का इनकार किया और उसके रसूलों की नाफ़रमानी की [123], और हर सरकश, हठधर्म ज़ालिम के हुक्म की पैरवी की। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 59 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 59 की तफ़्सीर

✅ [123] रसूलों की नाफ़रमानी और ज़ालिमों की पैरवी

क़ौमे आद ने एक रसूल (हूद अलै.) को झुठलाया जो तमाम रसूलों को झुठलाने के मुतरादिफ़ था, और हक़ के रहनुमाओं को छोड़कर ज़ालिम और मगरूर सरदारों के पीछे चले, जिसने उन्हें तबाह कर दिया।

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