Transliteration: (Falammaa zahaba an Ibraaheemar raw'u wa jaaa'at hul bushraaa yujaadilunaa fee qawmi Loot)
जब इब्राहीम (अलै.) को यक़ीन हो गया कि ये अल्लाह के मुकर्रम फ़रिश्ते हैं और बशारत मिल गई, तो उनका दिल मुतमइन हुआ।
हज़रत इब्राहीम (अलै.) निहायत मेहरबान दिल रखते थे, इसलिए आपने फ़रिश्तों से फ़रमाया कि क्या उन पर से अज़ाब टल नहीं सकता? क्या उनमें कुछ मोमिन नहीं हैं? ताकि उन्हें तौबा की मोहलत मिल सके।
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