कुरान - 11:74 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

74
فَلَمَّا ذَهَبَ عَنۡ إِبۡرَٰهِيمَ ٱلرَّوۡعُ وَجَآءَتۡهُ ٱلۡبُشۡرَىٰ يُجَٰدِلُنَا فِي قَوۡمِ لُوطٍ

Transliteration: (Falammaa zahaba an Ibraaheemar raw'u wa jaaa'at hul bushraaa yujaadilunaa fee qawmi Loot)

फिर जब इब्राहीम का ख़ौफ़ दूर हो गया [151] और उन्हें ख़ुशख़बरी मिल गई, तो वह हमसे लूत की क़ौम के बारे में तकरार (सिफ़ारिश) करने लगे [152]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 74 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 74 की तफ़्सीर

✅ [151] इत्मीनान और मसर्रत

जब इब्राहीम (अलै.) को यक़ीन हो गया कि ये अल्लाह के मुकर्रम फ़रिश्ते हैं और बशारत मिल गई, तो उनका दिल मुतमइन हुआ।

✅ [152] क़ौमे लूत के लिए नर्मी और बहस

हज़रत इब्राहीम (अलै.) निहायत मेहरबान दिल रखते थे, इसलिए आपने फ़रिश्तों से फ़रमाया कि क्या उन पर से अज़ाब टल नहीं सकता? क्या उनमें कुछ मोमिन नहीं हैं? ताकि उन्हें तौबा की मोहलत मिल सके।

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