कुरान - 11:77 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

77
وَلَمَّا جَآءَتۡ رُسُلُنَا لُوطٗا سِيٓءَ بِهِمۡ وَضَاقَ بِهِمۡ ذَرۡعٗا وَقَالَ هَٰذَا يَوۡمٌ عَصِيبٞ

Transliteration: (Wa lammaa jaaa'at Rusulunaa Lootan seee'a bihim wa daaqa bihim zar'anw wa qaala haazaa yawmun 'aseeb)

और जब हमारे फ़रिश्ते लूत के पास आए, तो वह उनकी वजह से ग़मगीन हुए और उनके सबब दिल तंग हुए और बोले, 'यह बड़ा सख़्त दिन है' [155]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 77 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 77 की तफ़्सीर

✅ [155] हज़रत लूत (अलै.) की फ़िक्र और तंगदिली

फ़रिश्ते निहायत ख़ूबसूरत नौजवानों की शक्ल में आए थे। हज़रत लूत (अलै.) अपनी क़ौम की बदचलनी और बद-फ़ेली से वाक़िफ़ थे, इसलिए मेहमानों की आबरू की फ़िक्र में उनका दिल तंग हुआ कि आज का दिन बड़ा इम्तिहान का दिन है।

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