कुरान - 11:84 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

84
۞وَإِلَىٰ مَدۡيَنَ أَخَاهُمۡ شُعَيۡبٗاۚ قَالَ يَٰقَوۡمِ ٱعۡبُدُواْ ٱللَّهَ مَا لَكُم مِّنۡ إِلَٰهٍ غَيۡرُهُۥۖ وَلَا تَنقُصُواْ ٱلۡمِكۡيَالَ وَٱلۡمِيزَانَۖ إِنِّيٓ أَرَىٰكُم بِخَيۡرٖ وَإِنِّيٓ أَخَافُ عَلَيۡكُمۡ عَذَابَ يَوۡمٖ مُّحِيطٖ

Transliteration: (Wa ilaa Madyana akhaahum Shu'aibaa; qaala yaa qawmi' budul laaha maa lakum min ilaahin ghairuhoo wa laa tanqusul mikyaala walmeezaan; inneee araakum bikhairinw wa innee akhaafu 'alaikum 'azaaba Yawmim muheet)

और मदयन की तरफ़ उनके भाई शुऐब को भेजा [171, 172]। उन्होंने कहा, 'ऐ मेरी क़ौम! अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई माबूद नहीं। और नाप और तौल में कमी न करो। बेशक मैं तुम्हें ख़ुशहाल देख रहा हूँ, लेकिन मुझे तुम पर घेर लेने वाले दिन के अज़ाब का ख़ौफ़ है [173]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 84 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 84 की तफ़्सीर

✅ [171] मदयन की क़ौम

मदयन हज़रत इब्राहीम (अलै.) के बेटे की औलाद में से एक क़बीला था जो शाम और हिजाज़ के दरमियान आबाद था।

✅ [172] हज़रत शुऐब (अलै.) की दावत

हज़रत शुऐब (अलै.) को 'ख़तीबुल अम्बिया' कहा जाता है। उन्होंने क़ौम को तौहीद की दावत दी और तिजारत में नाप-तौल की चोरी से रोका।

✅ [173] घेर लेने वाले दिन का अज़ाब

आप ने फ़रमाया कि अल्लाह ने तुम्हें हर तरह की नेअमत और फ़राग़त दी है, फिर नाप-तौल में बेईमानी क्यों करते हो? अगर बाज़ न आए तो ऐसा अज़ाब आएगा जो तुम सबको घेर लेगा।

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