कुरान - 11:82 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

82
فَلَمَّا جَآءَ أَمۡرُنَا جَعَلۡنَا عَٰلِيَهَا سَافِلَهَا وَأَمۡطَرۡنَا عَلَيۡهَا حِجَارَةٗ مِّن سِجِّيلٖ مَّنضُودٖ

Transliteration: (Falammaa jaaa'a amrunaa ja'alnaa 'aaliyahaa saafilahaa wa amtarnaa 'alaihaa hijaaratam min sijjeelim mandood)

फिर जब हमारा हुक्म आ पहुंचा, तो हमने उस बस्ती को उलट-पुलट कर दिया [168] और उस पर पकी हुई मिट्टी के पत्थर लगातार बरसाए [169]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 82 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 82 की तफ़्सीर

✅ [168] बस्ती का उलटा जाना

हज़रत जिब्रील (अलै.) ने अपने पर पर क़ौमे लूत की पूरी पांचों बस्तियों (सदूम वग़ैरा) को ज़मीन से उखाड़कर आसमान तक उठाया, यहाँ तक कि आसमान के फ़रिश्तों ने उनके कुत्तों के भौंकने की आवाज़ें सुनीं, फिर उसे औंधा करके ज़मीन पर पटक दिया।

✅ [169] पत्थरों की बारिश

फिर आसमान से सिज्जील (कंकरीले पके हुए पत्थर) की लगातार बारिश बरसाई गई जिससे जो बाक़ी बचे थे वे भी कुचलकर हलाक हो गए।

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