Transliteration: (Baqiyyatul laahi khairul lakum in kuntum mu'mineen; wa maa ana 'alaikum bihafeez)
'बक़िय्यतुल्लाह' से मुराद वह हलाल रोज़ी और हक़ीक़ी मुनाफ़ा है जो ईमानदारी के बाद अल्लाह अपने बंदे के लिए बाक़ी रखता है। हलाल की थोड़ी मिक़दार हराम के ढेरों से कहीं बेहतर और बा-बरकत है।
हज़रत शुऐब (अलै.) ने फ़रमाया कि मेरा काम हक़ का रास्ता दिखाना है, मैं तुम पर दारोग़ा नहीं कि तुम्हें ज़बरदस्ती नेक बना दूँ; अपने नफ़ा-नुक़सान के तुम ख़ुद ज़िम्मेदार हो।
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