कुरान - 11:86 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

86
بَقِيَّتُ ٱللَّهِ خَيۡرٞ لَّكُمۡ إِن كُنتُم مُّؤۡمِنِينَۚ وَمَآ أَنَا۠ عَلَيۡكُم بِحَفِيظٖ

Transliteration: (Baqiyyatul laahi khairul lakum in kuntum mu'mineen; wa maa ana 'alaikum bihafeez)

'अल्लाह का छोड़ा हुआ हलाल नफ़ा तुम्हारे लिए बेहतर है अगर तुम मोमिन हो [176]। और मैं तुम पर कोई निगहबान नहीं हूँ [177]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 86 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 86 की तफ़्सीर

✅ [176] हलाल रिज़्क़ में बरकत

'बक़िय्यतुल्लाह' से मुराद वह हलाल रोज़ी और हक़ीक़ी मुनाफ़ा है जो ईमानदारी के बाद अल्लाह अपने बंदे के लिए बाक़ी रखता है। हलाल की थोड़ी मिक़दार हराम के ढेरों से कहीं बेहतर और बा-बरकत है।

✅ [177] नबी का मन्सब

हज़रत शुऐब (अलै.) ने फ़रमाया कि मेरा काम हक़ का रास्ता दिखाना है, मैं तुम पर दारोग़ा नहीं कि तुम्हें ज़बरदस्ती नेक बना दूँ; अपने नफ़ा-नुक़सान के तुम ख़ुद ज़िम्मेदार हो।

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