कुरान - 11:88 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

88
قَالَ يَٰقَوۡمِ أَرَءَيۡتُمۡ إِن كُنتُ عَلَىٰ بَيِّنَةٖ مِّن رَّبِّي وَرَزَقَنِي مِنۡهُ رِزۡقًا حَسَنٗاۚ وَمَآ أُرِيدُ أَنۡ أُخَالِفَكُمۡ إِلَىٰ مَآ أَنۡهَىٰكُمۡ عَنۡهُۚ إِنۡ أُرِيدُ إِلَّا ٱلۡإِصۡلَٰحَ مَا ٱسۡتَطَعۡتُۚ وَمَا تَوۡفِيقِيٓ إِلَّا بِٱللَّهِۚ عَلَيۡهِ تَوَكَّلۡتُ وَإِلَيۡهِ أُنِيبُ

Transliteration: (Qaala yaa qawmi ara'aitum in kuntu 'alaa baiyinatim mir Rabbee wa razaqanee minhu rizqan hasanaa; wa maaa ureedu an ukhaalifakum ilaa maaa anhaakum 'anh; in ureedu illal islaaha mastata't; wa maa tawfeeqeee illaa billaah; 'alaihi tawakkaltu wa ilaihi uneeb)

शुऐब ने कहा, 'ऐ मेरी क़ौम! भला बताओ तो सही, अगर मैं अपने रब की तरफ़ से एक रौशन दलील पर हूँ [179] और उसने मुझे अपने पास से पाकीज़ा रिज़्क़ अता फ़रमाया है [180]। और मैं यह नहीं चाहता कि जिस चीज़ से तुम्हें रोकता हूँ, ख़ुद तुम्हारे पीछे वही करने लगूँ [181]। मैं तो जहाँ तक हो सके सिर्फ़ सुधार चाहता हूँ। और मेरी तौफ़ीक़ सिर्फ़ अल्लाह ही की मदद से है; उसी पर मैंने भरोसा किया और उसी की तरफ़ मैं रुजू करता हूँ [182]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 88 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 88 की तफ़्सीर

✅ [179] रौशन दलील और नुबुव्वत

हज़रत शुऐब (अलै.) ने फ़रमाया कि मुझे अल्लाह ने नुबुव्वत, बसीरत और मोजिज़ात की वाज़ेह दलील अता फ़रमाई है।

✅ [180] हलाल और पाकीज़ा रिज़्क़

अल्लाह ने मुझे हलाल और पाकीज़ा रोज़ी दी है, इसलिए मुझे तुम्हारे मालों की कोई लालच नहीं।

✅ [181] क़ौल व फ़ेल में मुताबक़त

सच्चा दाई वही है जो जिस बुराई से दूसरों को रोके, ख़ुद भी उससे पाक रहे। अम्बिया-ए-किराम का दामन हर क़िस्म की बुराई से हमेशा पाक व मुक़द्दस रहता है।

✅ [182] तौफ़ीक़े इलाही और तवक्कुल

हर नेक काम और इस्लाह की क़ुव्वत अल्लाह ही की अता से मुमकिन है; इंसान को सिर्फ़ अल्लाह पर तवक्कुल करना चाहिए।

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