कुरान - 11:89 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

89
وَيَٰقَوۡمِ لَا يَجۡرِمَنَّكُمۡ شِقَاقِيٓ أَن يُصِيبَكُم مِّثۡلُ مَآ أَصَابَ قَوۡمَ نُوحٍ أَوۡ قَوۡمَ هُودٍ أَوۡ قَوۡمَ صَٰلِحٖۚ وَمَا قَوۡمُ لُوطٖ مِّنكُم بِبَعِيدٖ

Transliteration: (Wa yaa qawmi laa yajri mannakum shiqaaqeee ai yuseebakum mislu maaa asaaba qawma Noohin aw qawma Hoodin aw qawma Saalih; wa maa qawmu Lootim minkum biba'eed)

'और ऐ मेरी क़ौम! मेरी मुख़ालफ़त तुमसे कहीं ऐसा जुर्म न करा दे कि तुम पर भी वही अज़ाब आ पड़े जो नूह की क़ौम पर, या हूद की क़ौम पर, या सालेह की क़ौम पर आया था। और लूत की क़ौम तो तुमसे कुछ दूर नहीं है [183]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 89 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 89 की तफ़्सीर

✅ [183] गुज़री हुई क़ौमों की तबाही से सबक़

हज़रत शुऐब (अलै.) ने नसीहत फ़रमाई कि मेरी दुश्मनी में हक़ का इनकार न करो, वरना तुम पर भी साबिक़ा उम्मतों जैसा अज़ाब आ जाएगा। और क़ौमे लूत का ज़माना और इलाक़ा तो तुम्हारे बिल्कुल क़रीब है, उनकी उजड़ी हुई बस्तियों से इब्रत हासिल करो।

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