Transliteration: (Qaaloo yaa Shu'aibu maa nafqahu kaseeram mimmaa taqoolu wa innaa lanaraaka feenaa da'eefanw wa law laa rahtuka larajamnaaka wa maaa anta 'alainaa bi'azeez)
काफ़िरों ने कहा कि तुम्हारी बातें हमारी समझ में नहीं आतीं, क्योंकि उनके दिलों पर नफ़रत और ग़फ़लत का पर्दा पड़ा हुआ था।
हज़रत शुऐब (अलै.) ज़ईफ़ुल-बसर (कमज़ोर नज़र वाले) और निहायत नर्म-मिज़ाज थे, इसलिए ज़ालिमों ने उन्हें कमज़ोर समझा।
वे सिर्फ़ हज़रत शुऐब के क़बीले के डर से उन पर हाथ नहीं उठाते थे क्योंकि क़बीले वाले ताक़तवर थे।
उन्होंने बेअदबी से कहा कि तुम्हारी हमारी नज़र में कोई इज़्ज़त नहीं, जो उनकी बदबख़्ती की दलील थी।
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