कुरान - 11:91 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

91
قَالُواْ يَٰشُعَيۡبُ مَا نَفۡقَهُ كَثِيرٗا مِّمَّا تَقُولُ وَإِنَّا لَنَرَىٰكَ فِينَا ضَعِيفٗاۖ وَلَوۡلَا رَهۡطُكَ لَرَجَمۡنَٰكَۖ وَمَآ أَنتَ عَلَيۡنَا بِعَزِيزٖ

Transliteration: (Qaaloo yaa Shu'aibu maa nafqahu kaseeram mimmaa taqoolu wa innaa lanaraaka feenaa da'eefanw wa law laa rahtuka larajamnaaka wa maaa anta 'alainaa bi'azeez)

वे बोले, 'ऐ शुऐब! तुम्हारी बहुत सी बातें तो हमारी समझ में नहीं आतीं [185], और हम तुम्हें अपने दरमियान कमज़ोर पाते हैं [186]। और अगर तुम्हारी बिरादरी (क़बीला) न होती [187], तो हम तुम्हें पत्थरों से मार डालते, और हमारी नज़र में तुम्हारी कोई हैसियत नहीं है [188]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 91 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 91 की तफ़्सीर

✅ [185] हक़ से अंधी बेरुखी

काफ़िरों ने कहा कि तुम्हारी बातें हमारी समझ में नहीं आतीं, क्योंकि उनके दिलों पर नफ़रत और ग़फ़लत का पर्दा पड़ा हुआ था।

✅ [186] नबी को ज़ाहिरी तौर पर कमज़ोर समझना

हज़रत शुऐब (अलै.) ज़ईफ़ुल-बसर (कमज़ोर नज़र वाले) और निहायत नर्म-मिज़ाज थे, इसलिए ज़ालिमों ने उन्हें कमज़ोर समझा।

✅ [187] क़बीले का लिहाज़

वे सिर्फ़ हज़रत शुऐब के क़बीले के डर से उन पर हाथ नहीं उठाते थे क्योंकि क़बीले वाले ताक़तवर थे।

✅ [188] मुनकिरीन की गुस्ताख़ी

उन्होंने बेअदबी से कहा कि तुम्हारी हमारी नज़र में कोई इज़्ज़त नहीं, जो उनकी बदबख़्ती की दलील थी।

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