कुरान - 11:85 सूरह हूद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

85
وَيَٰقَوۡمِ أَوۡفُواْ ٱلۡمِكۡيَالَ وَٱلۡمِيزَانَ بِٱلۡقِسۡطِۖ وَلَا تَبۡخَسُواْ ٱلنَّاسَ أَشۡيَآءَهُمۡ وَلَا تَعۡثَوۡاْ فِي ٱلۡأَرۡضِ مُفۡسِدِينَ

Transliteration: (Wa yaa qawmi awful mikyaala walmeezaana bilqisti wa laa tabkhasun naasa ashyaaa'ahum wa laa ta'saw fil ardi mufsideen)

'और ऐ मेरी क़ौम! नाप और तौल इंसाफ़ के साथ पूरी-पूरी भरो, और लोगों को उनकी चीज़ें घटाकर न दो [174], और ज़मीन में फ़साद फैलाते न फिरो [175]।' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह हूद आयत 85 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरा हूद – आयत 85 की तफ़्सीर

✅ [174] तिजारत में दियानतदारी

इस्लाम में तिजारत और कारोबार में इंसाफ़ व ईमानदारी फ़र्ज़ है। नाप-तौल में डांडी मारना और लोगों का हक़ मारना हराम और कबीरा गुनाह है।

✅ [175] ज़मीन में फ़साद की मुमानअत

नाहक़ माल खाना, डकैती करना और बद-दयानती फैलाना ज़मीन में फ़साद बरपा करना है जिससे अल्लाह की नाराज़गी लाज़िम आती है।

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