कुरान - 14:31 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
قُل لِّعِبَادِيَ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ يُقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ وَيُنفِقُواْ مِمَّا رَزَقۡنَٰهُمۡ سِرّٗا وَعَلَانِيَةٗ مِّن قَبۡلِ أَن يَأۡتِيَ يَوۡمٞ لَّا بَيۡعٞ فِيهِ وَلَا خِلَٰلٌ

Transliteration: (Qul li'ibaadiyal lazeena aamanoo yuqeemus Salaata wa yunfiqoo mimmaa razaqnaahum sirranw wa 'alaaniyatam min qabli any yaatiya Yawmul laa bai'un feehi wa laa khilaal)

मेरे उन बंदों से कह दीजिए जो ईमान लाए हैं कि वे नमाज़ क़ायम करें और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से छिपे और खुले रूप में ख़र्च करें, इससे पहले कि वह दिन आ पहुंचे जिसमें न कोई क्रय-विक्रय (सौदा) होगा और न कोई मित्रता काम आएगी। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 31 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] नमाज़ और इन्फ़ाक़ (दान) की ताकीद

ईमान वालों को आदेश दिया गया कि क़यामत से पहले अपने आमाल दुरुस्त कर लें। पाबंदी से नमाज़ पढ़ें और अल्लाह के दिए माल में से गुप्त व प्रत्यक्ष रूप से ग़रीबों पर ख़र्च करें।

✅ [2] क़यामत के दिन दौलत और दोस्ती बेअसर

उस दिन न तो कोई अपनी दौलत देकर छूट सकेगा और न ही कोई दुनियावी दोस्ती या सिफ़ारिश काम आएगी; केवल ईमान और नेक आमाल ही काम आएंगे।

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