कुरान - 14:32 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
ٱللَّهُ ٱلَّذِي خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ وَٱلۡأَرۡضَ وَأَنزَلَ مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَخۡرَجَ بِهِۦ مِنَ ٱلثَّمَرَٰتِ رِزۡقٗا لَّكُمۡۖ وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلۡفُلۡكَ لِتَجۡرِيَ فِي ٱلۡبَحۡرِ بِأَمۡرِهِۦۖ وَسَخَّرَ لَكُمُ ٱلۡأَنۡهَٰرَ

Transliteration: (Allaahul lazee khalaqas samaawaati wal arda wa anzala minas samaaa'i maaa'an faakhraja bihee minas samaraati rizqal lakum wa sakhkhara lakumul fulka litajriya fil bahri bi amrihee wa sakhkhara lakumul anhaar)

अल्लाह ही है जिसने आकाशों और धरती को पैदा किया, और आकाश से पानी बरसाया फिर उसके द्वारा तुम्हारे खाने के लिए फल निकाले; और उसने नौकाओं (जहाज़ों) को तुम्हारे काम में लगा दिया ताकि वे उसके आदेश से समुद्र में चलें, और उसने नदियों को भी तुम्हारे अधीन कर दिया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 32 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] जल, थल और प्रकृति की नेमतें

अल्लाह तआला ने पूरी व्यवस्था इंसान की सेवा के लिए बनाई: बारिश से अनाज व फल उगाना, समुद्र के सीने पर भारी जहाज़ों को तैराना और मीठे पानी की नदियां जारी करना। यह सब केवल एक अल्लाह का एहसान है।

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