कुरान - 14:34 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَءَاتَىٰكُم مِّن كُلِّ مَا سَأَلۡتُمُوهُۚ وَإِن تَعُدُّواْ نِعۡمَتَ ٱللَّهِ لَا تُحۡصُوهَآۗ إِنَّ ٱلۡإِنسَٰنَ لَظَلُومٞ كَفَّارٞ

Transliteration: (Wa aataakum min kulli maa sa altumooh; wa in ta'uddoo ni'matal laahi laa tuhsoohaa; innal insaana lazaloo mun kaffaar (section 5))

और उसने तुम्हें वह सब कुछ दिया जो तुमने उससे मांगा; और यदि तुम अल्लाह की नेमतों की गणना करना चाहो, तो उन्हें पूरी तरह गिन नहीं सकोगे। वास्तव में मनुष्य बड़ा ही अन्यायी (ज़ालिम), अत्यंत कृतघ्न (नाशुकरा) है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 34 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] व इन तअुद्दू निअमतल्लाहि ला तुह़सूहा

मानव जीवन की हर सांस, धड़कन, दृष्टि, बुद्धि, पानी, हवा और रिज़्क़ अल्लाह का ऐसा असीम उपहार है कि यदि सारी दुनिया मिलकर भी अल्लाह की नेमतों को गिनना चाहे तो कभी नहीं गिन सकती।

✅ [2] इंसान की नाक़द्री और ज़ुल्म

इतने उपकारों के बावजूद अभागा इंसान अपने रब की नाफ़रमानी करता है, ज़ुल्म ढाता है और हर घड़ी नाशुक्री का रोना रोता रहता है।

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