कुरान - 14:35 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
وَإِذۡ قَالَ إِبۡرَٰهِيمُ رَبِّ ٱجۡعَلۡ هَٰذَا ٱلۡبَلَدَ ءَامِنٗا وَٱجۡنُبۡنِي وَبَنِيَّ أَن نَّعۡبُدَ ٱلۡأَصۡنَامَ

Transliteration: (Wa iz qaala Ibraaheemu Rabbij 'al haazal balada aaminanw wajnubnee wa baniyya an na'budal asnaam)

और याद करो जब इब्राहीम ने प्रार्थना की, "ऐ मेरे रब! इस नगर (मक्का) को शांति और सुरक्षा वाला बना, और मुझे और मेरे बेटों को इससे बचाए रख कि हम मूर्तियों (बुतों) की पूजा करें।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 35 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] हज़रत इब्राहीम (अलै.) की ऐतिहासिक प्रार्थना

हज़रत इब्राहीम ने पवित्र नगर मक्का के लिए दो प्रमुख दुआएं मांगीं: पहली यह कि यह नगर सदा अमन व अमान का गहवारा बना रहे, और दूसरी यह कि वे स्वयं और उनकी आने वाली नस्लें हर प्रकार की बुतपरस्ती और शिर्क की गंदगी से सुरक्षित रहें।

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