कुरान - 14:37 सूरह इब्राहीम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
رَّبَّنَآ إِنِّيٓ أَسۡكَنتُ مِن ذُرِّيَّتِي بِوَادٍ غَيۡرِ ذِي زَرۡعٍ عِندَ بَيۡتِكَ ٱلۡمُحَرَّمِ رَبَّنَا لِيُقِيمُواْ ٱلصَّلَوٰةَ فَٱجۡعَلۡ أَفۡـِٔدَةٗ مِّنَ ٱلنَّاسِ تَهۡوِيٓ إِلَيۡهِمۡ وَٱرۡزُقۡهُم مِّنَ ٱلثَّمَرَٰتِ لَعَلَّهُمۡ يَشۡكُرُونَ

Transliteration: (Rabbanaaa inneee askantu min zurriyyatee biwaadin ghairi zee zar'in 'inda Baitikal Muharrami Rabbanaa liyuqeemus Salaata faj'al af'idatam minan naasi tahweee ilaihim warzuqhum minas samaraati la'allahum yashkuroon)

"ऐ हमारे रब! मैंने अपनी कुछ संतान को तेरे सम्मानित घर (काबा) के पास एक ऐसी घाटी में बसा दिया है जहाँ कोई खेती नहीं होती; ऐ हमारे रब! ताकि वे नमाज़ क़ायम करें; अतः तू कुछ लोगों के दिलों को उनकी ओर आकृष्ट (झुका) दे, और उन्हें फलों की रोज़ी अता फ़रमा ताकि वे कृतज्ञ बनें।" (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह इब्राहीम आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह इब्राहीम – आयत 37 का हिन्दी अनुवाद और तफ़्सीर

✅ [1] मक्का की बंजर वादी में हज़रत हाजिरा और इस्माईल का बसना

हज़रत इब्राहीम ने अल्लाह के आदेश पर अपनी पत्नी हज़रत हाजिरा और दुधमुंहे बेटे हज़रत इस्माईल को मक्का की निर्जन, सूखी और पथरीली घाटी में छोड़ दिया। उनका मक़सद केवल यह था कि अल्लाह के घर के पास नमाज़ क़ायम हो।

✅ [2] दुआ का मोजिज़ाना असर

अल्लाह ने इस दुआ को ऐसा क़ुबूल फ़रमाया कि आज दुनिया भर के करोड़ों इंसानों के दिल मक्का और काबा की तरफ़ चुंबक की तरह खिंचे चले आते हैं, और मक्का में खेती न होने के बावजूद दुनिया भर के बेहतरीन फल और नेमतें हर समय प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहती हैं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now