कुरान - 31:10 सूरह लुक़मान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

10
خَلَقَ ٱلسَّمَٰوَٰتِ بِغَيۡرِ عَمَدٖ تَرَوۡنَهَاۖ وَأَلۡقَىٰ فِي ٱلۡأَرۡضِ رَوَٰسِيَ أَن تَمِيدَ بِكُمۡ وَبَثَّ فِيهَا مِن كُلِّ دَآبَّةٖۚ وَأَنزَلۡنَا مِنَ ٱلسَّمَآءِ مَآءٗ فَأَنۢبَتۡنَا فِيهَا مِن كُلِّ زَوۡجٖ كَرِيمٍ

Transliteration: (Khalaqas samaawaati bi ghairi 'amadin tarawnahaa wa alqaa fil ardi rawaasiya an tameeda bikum wa bassa feehaa min kulli daaabbah; wa anzalnaa minas samaaa'i maaa'an fa ambatnaa feeha min kulli zawjin kareem)

उसने आसमानों को ऐसे सुतूनों (खंभों) के बग़ैर पैदा किया जिन्हें तुम देख सको [12], और ज़मीन में पहाड़ रख दिए ताकि वह तुम्हें लेकर डोलने न लगे [13], और उसमें हर क़िस्म के जानवर फैला दिए [14]; और हमने आसमान से पानी उतारा [15], फिर उसमें हर क़िस्म के उम्दा जोड़े (नबातात) उगा दिए [16]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह लुक़मान आयत 10 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह लुक़मान तफ़सीर - आयत 10

"उसने आसमानों को ऐसे सुतूनों (खंभों) के बग़ैर पैदा किया जिन्हें तुम देख सको [12], और ज़मीन में पहाड़ रख दिए ताकि वह तुम्हें लेकर डोलने न लगे [13], और उसमें हर क़िस्म के जानवर फैला दिए [14]; और हमने आसमान से पानी उतारा [15], फिर उसमें हर क़िस्म के उम्दा जोड़े (नबातात) उगा दिए [16]।"

[12] आसमान के अनदेखे सुतून

यह हिस्सा आसमान के मोअजिज़ाती ठहराव को उजागर करता है, जिसे ज़ाहिरी खंभों के बग़ैर क़ायम किया गया। यह इस हक़ीक़त को वाज़ेह करता है कि कायनात का सारा निज़ाम अल्लाह के हुक्म पर टिका हुआ है, न कि किसी दिखने वाले सहारे पर। “जिन्हें तुम देख सको” का जुमला यह इशारा करता है कि कायनात को थामने वाले इलाही क़वानीन और क़ुव्वतें मौजूद हैं—जो इंसानी नज़रों से ओझल हैं।

[13] ज़मीन के लिए पहाड़ों की लंगर-अंदाज़ी

पहाड़ों को “लंगर” (मेख़ें) क़रार दिया गया जो ज़मीन को डोलने और हिलने से बचाते हैं। यह तशबीह उनके तवाज़ुन क़ायम रखने वाले किरदार को ज़ाहिर करती है। क़ुरआन बार-बार ऐसी अज़ीम मिसालें देता है ताकि यह वाज़ेह हो सके कि ज़मीन का तवाज़ुन इत्तिफ़ाक़िया नहीं बल्कि एक सोची-समझी इलाही तदबीर का हिस्सा है ताकि इंसान इस पर आराम से बस सके।

[14] तख़लीक़ का तनोअ (विविधता)

अल्लाह तआला ने ज़मीन में तरह-तरह के जानवर फैला दिए, जो उसकी तख़लीक़ की वुसअत का मुज़ाहिरा हैं। हर मख़लूक़ अपनी ख़ास सिफ़ात और माहौल के साथ अल्लाह की हकीमाना क़ुदरत और कामिल कारीगरी का सुबूत है।

[15] पानी: ज़िंदगी का चश्मा

आसमान से पानी उतारने से मुराद बारिश है, जो तमाम जानदारों की ज़िंदगी के लिए लाज़िमी है। यह एक रहमत और निशानी है—जो बंजर ज़मीन को सरसब्ज़ बनाकर रोज़ी का निज़ाम चलाती है।

[16] नबातात में जोड़ों का निज़ाम

आयत का इख़्तिताम “उम्दा जोड़ों” की पैदाइश पर होता है, जो यह बताता है कि पेड़-पौधों में भी नर और मादा के जोड़े पाए जाते हैं, जो नबातात में तवाज़ुन, हम-आहंगी और अफ़ज़ाइश का निज़ाम दिखाते हैं। यह क़ुरआन के उस बुनियादी उसूल की ताईद करता है कि कायनात की हर चीज़ जोड़ों में पैदा की गई है—नर व मादा, दिन व रात, सूरज व चाँद—जो सब मिलकर ख़ालिक़ की वहदानियत और उसकी हिकमत की गवाही देते हैं।

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