कुरान - 31:8 सूरह लुक़मान अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

8
إِنَّ ٱلَّذِينَ ءَامَنُواْ وَعَمِلُواْ ٱلصَّـٰلِحَٰتِ لَهُمۡ جَنَّـٰتُ ٱلنَّعِيمِ

Transliteration: (Innal lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati lahum Janaatun Na'eem)

बेशक जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए, उनके लिए नेमतों भरे बाग़ात (जन्नतें) हैं [11]; (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह लुक़मान आयत 8 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह लुक़मान तफ़सीर - आयत 8

"बेशक जो लोग ईमान लाए और उन्होंने नेक अमल किए, उनके लिए नेमतों भरे बाग़ात (जन्नतें) हैं [11];"

[11] जन्नत में दाख़िला: शरीअत और फ़ज़्ल के एतबार से

यह आयत वाज़ेह तौर पर फ़रमाती है कि जन्नत उन लोगों का इनाम है जो ईमान के साथ नेक आमाल को जमा करते हैं। “नेअमतों भरे बाग़ात” का लफ़्ज़ उस हमेशा रहने वाली ख़ुशी और सुकून को ज़ाहिर करता है जो ईमान वालों के इंतज़ार में है।

इलाही क़ानून (शरीअत) के मुताबिक़ जन्नत में दाख़िला तक़वे की बिना पर हासिल होता है—यानी जो ईमान लाते हैं और नेक काम करते हैं वे हक़ के एतबार से इसके हक़दार ठहरते हैं। ताहम, दूसरी आयात में अल्लाह तआला यह भी बयान फ़रमाता है कि वह अपने फ़ज़्ल व करम से गुनाहगारों को भी जन्नत में दाख़िल फ़रमाएगा—नेक बंदों की शफ़ाअत और बरकतों के ज़रिए।

यह आयत ख़ास तौर पर अदल के उसूल (क़ानून) को बयान करती है, न कि महज़ फ़ज़्ल को। इसलिए यह उन आयात के ख़िलाफ़ नहीं है जो इलाही बख़्शिश को बयान करती हैं। बल्कि दोनों उसूल—अदल और रहमत—इलाही निज़ाम में बाहम जुड़े हुए हैं, जो नेकोकारों को उम्मीद और गुनाहगारों को तौबा व मग्फ़िरत की राह दिखाते हैं।

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