कुरान - 19:20 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

20
قَالَتۡ أَنَّىٰ يَكُونُ لِي غُلَٰمٞ وَلَمۡ يَمۡسَسۡنِي بَشَرٞ وَلَمۡ أَكُ بَغِيّٗا

Transliteration: (Qaalat anna yakoonu lee ghulaamunw wa lam yamsasnee bashrunw wa lam aku baghiyyaa)

मरयम ने कहा, 'मेरे यहाँ लड़का कैसे हो सकता है जबकि मुझे किसी मर्द ने छुआ तक नहीं और न मैं कोई बदचलन (बदकार) औरत हूँ?' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 20 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 20

✅ पाकदामन मरयम का तअज्जुब

हज़रत मरयम ने हैरत से पूछा कि जब मेरा निकाह नहीं हुआ और न मैंने कभी कोई बदकारी की, तो बग़ैर बाप के बच्चा कैसे मुमकिन है?

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