कुरान - 19:38 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

38
أَسۡمِعۡ بِهِمۡ وَأَبۡصِرۡ يَوۡمَ يَأۡتُونَنَا لَٰكِنِ ٱلظَّـٰلِمُونَ ٱلۡيَوۡمَ فِي ضَلَٰلٖ مُّبِينٖ

Transliteration: (Asmi' bihim wa absir Yawma ya'toonanaa laakiniz zaalimoonal yawma fee dalaalin mubeen)

जिस दिन वे हमारे सामने हाज़िर होंगे, वे क्या ही ख़ूब सुनने वाले और क्या ही ख़ूब देखने वाले होंगे! लेकिन आज ये ज़ालिम लोग खुली गुमराही में पड़े हुए हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 38 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 38

✅ महशर में मुजरिमों की खुली आंखें और कान

क़ियामत के दिन जब हक़ीक़तें बेनक़ाब होंगी, तो इन मुनकिरों के कान और आंखें खुल जाएंगी और वे सब कुछ साफ़-साफ़ सुनेंगे और देखेंगे। लेकिन उस वक़्त का देखना और सुनना बेफ़ायदा होगा, क्योंकि दुनिया में जब सोचने-समझने का वक़्त था, तब वे खुली गुमराही में मुब्तला रहे।

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