कुरान - 19:37 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

37
فَٱخۡتَلَفَ ٱلۡأَحۡزَابُ مِنۢ بَيۡنِهِمۡۖ فَوَيۡلٞ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ مِن مَّشۡهَدِ يَوۡمٍ عَظِيمٍ

Transliteration: (Fakhtalafal ahzaabu min bainihim fawailul lillazeena kafaroo min mashhadi Yawmin 'azeem)

फिर उनके दरमियान के गिरोहों ने आपस में इख़्तिलाफ़ किया; पस उन लोगों के लिए जिन्होंने कुफ़्र किया एक बड़े (खौफ़नाक) दिन की हाज़िरी की बड़ी तबाही (ख़राबी) है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 37 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 37

✅ ईसाइयों व यहूदियों का इख़्तिलाफ़ और अज़ीम दिन की हलाकत

हज़रत ईसा के बाद लोगों ने हक़ को छोड़कर मुख़्तलिफ़ फ़िरक़े बना लिए: कुछ ने उन्हें ख़ुदा कह दिया, कुछ ने ख़ुदा का बेटा, और यहूदियों ने उनकी नबुव्वत का इनकार किया। अल्लाह ने तंबीह फ़रमाई कि क़ियामत के उस अज़ीम और भयानक दिन इन काफ़िरों की सख़्त बर्बादी होगी।

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