कुरान - 19:39 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

39
وَأَنذِرۡهُمۡ يَوۡمَ ٱلۡحَسۡرَةِ إِذۡ قُضِيَ ٱلۡأَمۡرُ وَهُمۡ فِي غَفۡلَةٖ وَهُمۡ لَا يُؤۡمِنُونَ

Transliteration: (Wa anzirhum Yawmal hasrati iz qudiyal amr; wa hum fee ghaflatinw wa hum laa yu'minoon)

और आप उन्हें 'हसरत के दिन' (पछतावे के दिन) से डराइए, जब बात का फ़ैसला कर दिया जाएगा; और वे (इस वक़्त) ग़फ़लत में पड़े हैं और ईमान नहीं ला रहे हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 39 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 39

✅ यौमुल हसरत (पछतावे का दिन) और मौत को ज़िबह करना

क़ियामत के दिन को 'यौमुल हसरत' फ़रमाया गया है क्योंकि उस दिन काफ़िर अपने कुफ़्र पर पछताएंगे और मोमिन अपनी नेकियों में कमी पर अफ़सोस करेंगे। हदीस के मुताबिक़ उस दिन मौत को एक मेंढे की शक्ल में लाकर जन्नत और दोज़ख़ के बीच ज़िबह कर दिया जाएगा और एलान होगा कि अब कभी मौत नहीं आएगी।

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