Transliteration: (Wa anzirhum Yawmal hasrati iz qudiyal amr; wa hum fee ghaflatinw wa hum laa yu'minoon)
क़ियामत के दिन को 'यौमुल हसरत' फ़रमाया गया है क्योंकि उस दिन काफ़िर अपने कुफ़्र पर पछताएंगे और मोमिन अपनी नेकियों में कमी पर अफ़सोस करेंगे। हदीस के मुताबिक़ उस दिन मौत को एक मेंढे की शक्ल में लाकर जन्नत और दोज़ख़ के बीच ज़िबह कर दिया जाएगा और एलान होगा कि अब कभी मौत नहीं आएगी।
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