कुरान - 19:35 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

35
مَا كَانَ لِلَّهِ أَن يَتَّخِذَ مِن وَلَدٖۖ سُبۡحَٰنَهُۥٓۚ إِذَا قَضَىٰٓ أَمۡرٗا فَإِنَّمَا يَقُولُ لَهُۥ كُن فَيَكُونُ

Transliteration: (Maa kaana lillaahi ai yattakhiza minw waladin Subhaanah; izaa qadaaa amran fa innamaa yaqoolu lahoo kun fa yakoon)

अल्लाह की यह शान नहीं कि वह किसी को अपना बेटा बनाए; वह पाक है! जब वह किसी काम का फ़ैसला फ़रमाता है, तो बस उससे कहता है कि 'हो जा' तो वह हो जाता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 35 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 35

✅ 'कुन फ़-यकून' - अल्लाह औलाद से पाक है

अल्लाह तआला औलाद, बीवी और हर किस्म की कमज़ोरी से पाक और बेनियाज़ है। उसे किसी चीज़ के बनाने के लिए जिस्मानी अस्बाब की हाजत नहीं, वह जब किसी चीज़ का इरादा फ़रमाता है तो सिर्फ़ हुक्म देता है 'कुन' (हो जा), और वह फ़ौरन वजूद में आ जाती है। हज़रत ईसा की पैदाइश भी इसी 'कुन' का करिश्मा थी।

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