कुरान - 19:33 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
وَٱلسَّلَٰمُ عَلَيَّ يَوۡمَ وُلِدتُّ وَيَوۡمَ أَمُوتُ وَيَوۡمَ أُبۡعَثُ حَيّٗا

Transliteration: (Wassalaamu 'alaiya yawma wulidtu wa yawma amootu wa yawma ub'asu haiyaa)

'और सलामती है मुझ पर जिस दिन मैं पैदा हुआ, और जिस दिन मैं मरूँगा, और जिस दिन मैं दोबारा ज़िन्दा करके उठाया जाऊँगा!' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 33

✅ हज़रत ईसा पर सलामती के तीन अज़ीम मरहले

हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने अपनी पैदाइश, दुनियावी वफ़ात (जो आसमान से उतरने के बाद होगी), और क़ियामत के दिन दोबारा उठाए जाने पर इलाही सलामती की गवाही दी।

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