कुरान - 19:31 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
وَجَعَلَنِي مُبَارَكًا أَيۡنَ مَا كُنتُ وَأَوۡصَٰنِي بِٱلصَّلَوٰةِ وَٱلزَّكَوٰةِ مَا دُمۡتُ حَيّٗا

Transliteration: (Wa ja'alanee mubaarakan aina maa kuntu wa awsaanee bis Salaati waz Zakaati maa dumtu haiyaa)

'और उसने मुझे बा-बरकत बनाया है जहाँ कहीं भी मैं रहूँ, और उसने मुझे नमाज़ और ज़कात की ताकीद फ़रमाई है जब तक मैं ज़िन्दा रहूँ;' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 31

✅ बरकत, नमाज़ और ज़कात की पाबंदी

हज़रत ईसा ने फ़रमाया कि अल्लाह ने मुझे लोगों के लिए सरापा बरकत, ख़ैर और हिदायत का ज़रिया बनाया है, और ज़िन्दगी भर नमाज़ क़ायम रखने और ग़रीबों को ज़कात देने का हुक्म फ़रमाया है।

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