कुरान - 19:30 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
قَالَ إِنِّي عَبۡدُ ٱللَّهِ ءَاتَىٰنِيَ ٱلۡكِتَٰبَ وَجَعَلَنِي نَبِيّٗا

Transliteration: (Qaala innee 'abdullaahi aataaniyal Kitaaba wa ja'alanee Nabiyyaa)

उस (बच्चे ईसा) ने कहा, 'बेशक मैं अल्लाह का बन्दा हूँ; उसने मुझे किताब दी है और मुझे नबी बनाया है;' (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 30

✅ पालने में हज़रत ईसा का पहला कलाम: बंदा-ए-ख़ुदा और नबी

अल्लाह के अज़ीम मौजिज़े से गोद के बच्चे हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) ने फ़सीह ज़बान में बोलना शुरू किया। सबसे पहला लफ़्ज़ फ़रमाया: 'इन्नी अब्दुल्लाह' (मैं अल्लाह का बन्दा हूँ), ताकि मुस्तक़बिल में लोग उन्हें ख़ुदा या ख़ुदा का बेटा न समझ बैठें। साथ ही नबुव्वत और किताब की बशारत दी।

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