कुरान - 19:87 सूरह मरयम अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

87
لَّا يَمۡلِكُونَ ٱلشَّفَٰعَةَ إِلَّا مَنِ ٱتَّخَذَ عِندَ ٱلرَّحۡمَٰنِ عَهۡدٗا

Transliteration: (Laa yamlikoonash shafaa'ata illaa manittakhaza 'indar Rahmaani 'ahdaa)

वे किसी शफ़ाअत (सिफ़ारिश) का इख़्तियार नहीं रखेंगे, सिवाय उस शख़्स के जिसने रहमान से कोई अहद (परवाना) हासिल कर लिया हो। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह मरयम आयत 87 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह मरयम - आयत 87

✅ शफ़ाअत का हक़ सिर्फ़ अल्लाह की इजाज़त से

उस दिन किसी को खुद-ब-खुद सिफ़ारिश करने की जुर्रत नहीं होगी। सिर्फ़ वही शख़्स शफ़ाअत कर सकेगा जिसे अल्लाह इजाज़त दे (जैसे अंबिया-ए-किराम), और शफ़ाअत सिर्फ़ उसी के हक़ में होगी जो तौहीद पर मरा हो।

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