कुरान - 50:16 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

16
وَلَقَدۡ خَلَقۡنَا ٱلۡإِنسَٰنَ وَنَعۡلَمُ مَا تُوَسۡوِسُ بِهِۦ نَفۡسُهُۥۖ وَنَحۡنُ أَقۡرَبُ إِلَيۡهِ مِنۡ حَبۡلِ ٱلۡوَرِيدِ

Transliteration: (Wa laqad khalaqnal insaana wa na'lamu maa tuwaswisu bihee nafsuhoo wa Nahnu aqrabu ilaihi min hablil wareed)

और बेशक हमने इंसान को पैदा किया और हम जानते हैं जो वसवसे उसके दिल में आते हैं, और हम उसकी गर्दन की रग (शाह-रग) से भी ज़्यादा उसके क़रीब हैं। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 16 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 16

✅ 'हबलिल वरीद' (शाह-रग) से ज़्यादा क़रीब

अल्लाह तआला अपने इल्म, क़ुदरत और एहते के ऐतबार से इंसान के इस दर्जा क़रीब है कि दिल में पैदा होने वाले बारीक तरीन ख़यालात व वसवसों से भी बाख़बर है।

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