कुरान - 50:18 सूरह क़ाफ़ अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

18
مَّا يَلۡفِظُ مِن قَوۡلٍ إِلَّا لَدَيۡهِ رَقِيبٌ عَتِيدٞ

Transliteration: (Maa yalfizu min qawlin illaa ladaihi raqeebun 'ateed)

वह मुंह से कोई लफ़्ज़ नहीं निकालता मगर उसके पास एक निगहबान (लिखने के लिए) तैयार रहता है। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह क़ाफ़ आयत 18 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

📖 सूरह क़ाफ़ - आयत 18

✅ हर बात का रिकार्ड ('रक़ीबुन अतीद')

इंसान की ज़बान से निकला हुआ हर एक कलिमा फौरन महफ़ूज़ कर लिया जाता है; इसलिए इंसान को अपनी गुफ़्तगू में अल्लाह का ख़ौफ़ रखना चाहिए।

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