Transliteration: (Qaala Rabbigh fir lee wa hab lee mulkal laa yambaghee li ahadin min ba'dee innaka Antal Wahhaab)
"अर्ज़ की: ऐ मेरे रब! मुझे बख़्श दे [74] और मुझे ऐसी सल्तनत अता फ़रमा जो मेरे बाद किसी के शायाने शान न हो [75], बेशक तू ही बड़ा अता फ़रमाने वाला है [76]!"
हज़रत सुलैमान ने "इंशा-अल्लाह" न कहने के तर्के औला पर मग़फ़िरत तलब की। यह अंबिया की आजिज़ाना बंदगी और मक़ामे ख़शियत की अलामत है।
आपने ऐसी सल्तनत की दुआ फ़रमाई जो आपके लिए नबूवत का रौशन मोजिज़ा बने और जिस पर हवा, जिन्नात और परिंदों की हुकूमत हो, जो किसी और के लिए मुम्किन न हो।
अल्लाह तआला ही "अल-वहाब" है जो बिना किसी इवज़ के बे-पनाह ख़ज़ाने और नेअमतें अता फ़रमाता है।
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