कुरान - 38:33 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

33
رُدُّوهَا عَلَيَّۖ فَطَفِقَ مَسۡحَۢا بِٱلسُّوقِ وَٱلۡأَعۡنَاقِ

Transliteration: (Ruddoohaa 'alaiya fa tafiqa mas-ham bissooqi wal a'naaq)

(सुलैमान ने हुक्म दिया:) उन्हें मेरे पास वापस लाओ [70]! फिर वे उनकी पिंडलियों और गर्दनों पर हाथ फेरने लगे [71]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 33 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 33

"(सुलैमान ने हुक्म दिया:) उन्हें मेरे पास वापस लाओ [70]! फिर वे उनकी पिंडलियों और गर्दनों पर हाथ फेरने लगे [71]!"

[70] घोड़ों को दोबारा तलब फ़रमाना

हज़रत सुलैमान ने घोड़ों की रफ़्तार देखने के बाद उन्हें दोबारा अपने पास बुलाने का हुक्म दिया ताकि उनका मज़ीद मुआइना फ़रमाएं।

[71] पिंडलियों और गर्दनों पर दस्त-ए-शफ़क़त फेरना

आपने शफ़क़त व मुहब्बत से उनकी गर्दनों और पिंडलियों पर हाथ फेरा। बाज़ इस्राईली रिवायतों में जो ज़िक्र है कि उन्होंने घोड़ों को क़त्ल कर दिया, वह सरासर बातिल और शान-ए-नबूवत के ख़िलाफ़ है। जिहाद के जानवरों की देख-रेख और उनसे शफ़क़त अंबिया की सुन्नत है।

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