Transliteration: (Iz 'urida 'alaihi bil'ashiy yis saafinaatul jiyaad)
"जब तीसरे पहर उनके सामने तीन पाँव पर खड़े, चौथे सुम की नोक लगाए तेज़ घोड़े पेश किए गए [66],"
ज़ुहर की नमाज़ के बाद हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) के सामने एक हज़ार आला नस्ल के अरबी घोड़े पेश किए गए। ये घोड़े अल्लाह की राह में जिहाद के लिए तैयार किए गए थे।
उनकी शान, नफ़ासत और हुस्न हज़रत सुलैमान की अज़ीम सल्तनत और अल्लाह के दीन की सरबुलंदी के लिए उनकी बेमिसाल तय्यारी का मुज़ाहरा थी।
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