कुरान - 38:31 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

31
إِذۡ عُرِضَ عَلَيۡهِ بِٱلۡعَشِيِّ ٱلصَّـٰفِنَٰتُ ٱلۡجِيَادُ

Transliteration: (Iz 'urida 'alaihi bil'ashiy yis saafinaatul jiyaad)

जब तीसरे पहर उनके सामने तीन पाँव पर खड़े, चौथे सुम की नोक लगाए तेज़ घोड़े पेश किए गए [66], (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 31 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 31

"जब तीसरे पहर उनके सामने तीन पाँव पर खड़े, चौथे सुम की नोक लगाए तेज़ घोड़े पेश किए गए [66],"

[66] हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) के सामने जिहाद के घोड़ों का मुआइना

ज़ुहर की नमाज़ के बाद हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) के सामने एक हज़ार आला नस्ल के अरबी घोड़े पेश किए गए। ये घोड़े अल्लाह की राह में जिहाद के लिए तैयार किए गए थे।

उनकी शान, नफ़ासत और हुस्न हज़रत सुलैमान की अज़ीम सल्तनत और अल्लाह के दीन की सरबुलंदी के लिए उनकी बेमिसाल तय्यारी का मुज़ाहरा थी।

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