कुरान - 38:30 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

30
وَوَهَبۡنَا لِدَاوُۥدَ سُلَيۡمَٰنَۚ نِعۡمَ ٱلۡعَبۡدُ إِنَّهُۥٓ أَوَّابٌ

Transliteration: (Wa wahabnaa li Daawooda Sulaimaan; ni'mal 'abd; innahoo awwaab)

और हमने दाऊद को सुलैमान अता फ़रमाया [64], क्या ही बेहतरीन बंदे थे! बेशक वे बहुत रुजूअ करने वाले थे [65]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 30 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 30

"और हमने दाऊद को सुलैमान अता फ़रमाया [64], क्या ही बेहतरीन बंदे थे! बेशक वे बहुत रुजूअ करने वाले थे [65]!"

[64] हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) अज़ीम नेअमत

अल्लाह तआला ने हज़रत दाऊद (अलैहिस्सलाम) को हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) जैसा सालेह, मुक़द्दस बेटा और नबी अता फ़रमाया, जो ख़ास फ़ज़्ल व अता की अलामत है।

[65] कसरत से रुजूअ करने वाले

हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) अपने वालिद की तरह हर हाल में अल्लाह की तरफ़ रुजूअ फ़रमाने वाले, इबादतगुज़ार और शुक्रगुज़ार बंदे थे।

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