Transliteration: (Am naj'alul lazeena aamanoo wa 'amilus saalihaati kalmufisdeena fil ardi am naj'alul muttaqeena kalfujjaar)
"क्या हम उन लोगों को जो ईमान लाए [59] और नेक काम किए, उन जैसा कर दें जो ज़मीन में फ़साद मचाते हैं [60], या हम परहेज़गारों को बदकारों जैसा कर दें [61]?"
काफ़िर कहते थे कि अगर क़ियामत आई भी तो हमें मोमिनीन के बराबर दर्जा मिलेगा। अल्लाह ने उनके इस बातिल दावे को मुस्तरद फ़रमाया।
इंसाफ़ का तक़ाज़ा है कि नेक और बदकार कभी बराबर नहीं हो सकते। दुनिया का कोई बादशाह भी मुजाहिदीन और मुजरिमों को एक जैसा नहीं रखता।
जब आम मोमिन और काफ़िर बराबर नहीं, तो अंबिया-ए-किराम, सहाबा और औलिया-ए-इज़ाम का मर्तबा तो आम इंसानों से कहीं बुलंद व बाला है।
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