कुरान - 38:26 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

26
يَٰدَاوُۥدُ إِنَّا جَعَلۡنَٰكَ خَلِيفَةٗ فِي ٱلۡأَرۡضِ فَٱحۡكُم بَيۡنَ ٱلنَّاسِ بِٱلۡحَقِّ وَلَا تَتَّبِعِ ٱلۡهَوَىٰ فَيُضِلَّكَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِۚ إِنَّ ٱلَّذِينَ يَضِلُّونَ عَن سَبِيلِ ٱللَّهِ لَهُمۡ عَذَابٞ شَدِيدُۢ بِمَا نَسُواْ يَوۡمَ ٱلۡحِسَابِ

Transliteration: (Yaa Daawoodu innaa ja'alnaaka khaleefatan fil ardi fahkum bainan naasi bilhaqqi wa laa tattabi'il hawaa fayudillaka 'an sabeelil laah; innal lazeena yadilloona 'an sabeelil laah; lahum 'azaabun shadeedum bimaa nasoo Yawmal Hisaab (section 2))

ऐ दाऊद! बेशक हमने आपको ज़मीन में ख़लीफ़ा बनाया [51], पस आप लोगों के दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला कीजिए [52] और अपनी ख़्वाहिश की पैरवी न कीजिए [53], वर्ना वह आपको अल्लाह के रास्ते से भटका देगी [54], बेशक जो लोग अल्लाह के रास्ते से भटकते हैं [55], उनके लिए सख़्त अज़ाब है क्योंकि वे हिसाब के दिन को भूल गए [56]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 26 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 26

"ऐ दाऊद! बेशक हमने आपको ज़मीन में ख़लीफ़ा बनाया [51], पस आप लोगों के दरमियान हक़ के साथ फ़ैसला कीजिए [52] और अपनी ख़्वाहिश की पैरवी न कीजिए [53], वर्ना वह आपको अल्लाह के रास्ते से भटका देगी [54], बेशक जो लोग अल्लाह के रास्ते से भटकते हैं [55], उनके लिए सख़्त अज़ाब है क्योंकि वे हिसाब के दिन को भूल गए [56]!"

[51] ख़िलाफ़त और बादशाही

अल्लाह ने हज़रत दाऊद को ज़मीन में ख़लीफ़ा बनाया और नबूवत के साथ हुकूमत व बादशाही भी अता फ़रमाई।

[52] शहादत और गवाही पर फ़ैसला

हुक्मरानों और क़ाज़ियों के लिए लाज़िम है कि वे ज़ाहिरी गवाही और दलीलों की बुनियाद पर अदल व इंसाफ़ के साथ फ़ैसला करें।

[53] ख़्वाहिशात से परहेज़

अंबिया की ख़्वाहिशात तो अल्लाह की मर्ज़ी के ताबे होती हैं, मगर यहाँ उम्मत और हुक्मरानों को सबक़ देना मक़सूद है कि किसी रसूख़ या तरफ़दारी में न पड़ें।

[54] सिराते मुस्तक़ीम पर साबित-क़दमी

नाइंसाफ़ी और तरफ़दारी इन्सान को अल्लाह के सीधे रास्ते से भटका देती है।

[55] गुमराही का अज़ाब

जो लोग अक़ीदे या अमल में भटकते हैं, वे सख़्त अज़ाब के मुस्तहिक़ बनते हैं।

[56] रोज़े जज़ा को भूलना

आख़िरत की जवाबदेही को भूल जाना ही रिश्वत, बेइंसाफ़ी और तमाम गुनाहों की असल जड़ है।

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