कुरान - 38:27 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

27
وَمَا خَلَقۡنَا ٱلسَّمَآءَ وَٱلۡأَرۡضَ وَمَا بَيۡنَهُمَا بَٰطِلٗاۚ ذَٰلِكَ ظَنُّ ٱلَّذِينَ كَفَرُواْۚ فَوَيۡلٞ لِّلَّذِينَ كَفَرُواْ مِنَ ٱلنَّارِ

Transliteration: (Wa maa khalaqnas samaaa'a wal arda wa maa bainahumaa baatilaa; zaalika zannul lazeena kafaroo; fa waylul lil lazeena kafaroo minan Naar)

और हमने आसमान और ज़मीन को और जो कुछ उनके दरमियान है बेकार पैदा नहीं किया [57], यह तो उन लोगों का गुमान है जिन्होंने कुफ़्र किया [58], पस काफ़िरों के लिए आग (दोज़ख़) की ख़राबी है! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 27 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 27

"और हमने आसमान और ज़मीन को और जो कुछ उनके दरमियान है बेकार पैदा नहीं किया [57], यह तो उन लोगों का गुमान है जिन्होंने कुफ़्र किया [58], पस काफ़िरों के लिए आग (दोज़ख़) की ख़राबी है!"

[57] कायनात की बा-मक़सद तख़्लीक़

अल्लाह तआला ने आसमान, ज़मीन और तमाम कायनात को बेमक़सद पैदा नहीं किया। हर चीज़ में इलाही हिकमतें और इम्तिहान पोशीदा हैं।

[58] मुनकिरीन का बातिल गुमान और दोज़ख़ की सज़ा

यह समझना कि दुनिया बेमक़सद है और कोई हिसाब नहीं होगा, काफ़िरों की सोच है। इसी इंकार की वजह से वे जहन्नम की आग के मुस्तहिक़ बनते हैं।

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