कुरान - 38:29 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

29
كِتَٰبٌ أَنزَلۡنَٰهُ إِلَيۡكَ مُبَٰرَكٞ لِّيَدَّبَّرُوٓاْ ءَايَٰتِهِۦ وَلِيَتَذَكَّرَ أُوْلُواْ ٱلۡأَلۡبَٰبِ

Transliteration: (Kitaabun anzalnaahu ilaika mubaarakul liyaddabbarooo Aayaatihee wa liyatazakkara ulul albaab)

(यह) एक बा-बरकत किताब है जिसे हमने आपकी तरफ़ नाज़िल फ़रमाया [62], ताकि वे इसकी आयतों में ग़ौर करें और ताकि अक़्ल वाले नसीहत हासिल करें [63]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 29 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 29

"(यह) एक बा-बरकत किताब है जिसे हमने आपकी तरफ़ नाज़िल फ़रमाया [62], ताकि वे इसकी आयतों में ग़ौर करें और ताकि अक़्ल वाले नसीहत हासिल करें [63]!"

[62] क़ुरआने मजीद बा-बरकत किताब है

क़ुरआन मजीद बरकतों का सरचश्मा है। इसके अल्फ़ाज़, इसके मआनी, इसकी तिलावत करने वाले, सुनने वाले और इस पर अमल करने वाले सब बा-बरकत और इज़्ज़त वाले हैं।

[63] तदब्बुरे क़ुरआन की दावत

अल्लाह तआला ने अक़्ल वालों को दावत दी कि वे क़ुरआन की आयतों में गहराई से ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें और अपनी ज़िन्दगी को इसके मुताबिक़ ढालें।

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