Transliteration: (Faqaala inneee ahbabtu hubbal khairi 'an zikri Rabbee hattaa tawaarat bilhijaab)
"तो सुलैमान ने कहा: मुझे इन घोड़ों की मुहब्बत अपने रब की याद के लिए पसंद आई है [67] [68]; यहाँ तक कि वे घोड़े निगाहों से ओझल होकर परदे में छुप गए [69]।"
हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) ने फ़रमाया कि मुझे इन उम्दा घोड़ों से जो रग़बत है, वह दुनियावी लालच नहीं बल्कि अल्लाह की रज़ा और जिहाद की ख़ातिर है।
बाज़ लोगों ने यह समझा कि घोड़ों को देखने में नमाज़ क़ज़ा हो गई, लेकिन नबूवत की इस्मत ऐसी ग़फ़लत से पाक है। जिहाद की तैयारी ख़ुद अज़ीम इबादत और ज़िक्रे इलाही है।
"परदे में छुपने" से मुराद घोड़ों का दौड़ते हुए दूर निकल जाना और आँखों से ओझल हो जाना है, सूरज का डूबना नहीं।
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