कुरान - 38:32 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

32
فَقَالَ إِنِّيٓ أَحۡبَبۡتُ حُبَّ ٱلۡخَيۡرِ عَن ذِكۡرِ رَبِّي حَتَّىٰ تَوَارَتۡ بِٱلۡحِجَابِ

Transliteration: (Faqaala inneee ahbabtu hubbal khairi 'an zikri Rabbee hattaa tawaarat bilhijaab)

तो सुलैमान ने कहा: मुझे इन घोड़ों की मुहब्बत अपने रब की याद के लिए पसंद आई है [67] [68]; यहाँ तक कि वे घोड़े निगाहों से ओझल होकर परदे में छुप गए [69]। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 32 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 32

"तो सुलैमान ने कहा: मुझे इन घोड़ों की मुहब्बत अपने रब की याद के लिए पसंद आई है [67] [68]; यहाँ तक कि वे घोड़े निगाहों से ओझल होकर परदे में छुप गए [69]।"

[67] ज़राए-ए-इबादत से मुहब्बत

हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) ने फ़रमाया कि मुझे इन उम्दा घोड़ों से जो रग़बत है, वह दुनियावी लालच नहीं बल्कि अल्लाह की रज़ा और जिहाद की ख़ातिर है।

[68] इबादत और ज़िक्र

बाज़ लोगों ने यह समझा कि घोड़ों को देखने में नमाज़ क़ज़ा हो गई, लेकिन नबूवत की इस्मत ऐसी ग़फ़लत से पाक है। जिहाद की तैयारी ख़ुद अज़ीम इबादत और ज़िक्रे इलाही है।

[69] घोड़ों का निगाहों से ओझल होना

"परदे में छुपने" से मुराद घोड़ों का दौड़ते हुए दूर निकल जाना और आँखों से ओझल हो जाना है, सूरज का डूबना नहीं।

Sign up for Newsletter

×

Download Our Quran App

For a faster and smoother experience,
install our mobile app now.

Download Now