कुरान - 38:34 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

34
وَلَقَدۡ فَتَنَّا سُلَيۡمَٰنَ وَأَلۡقَيۡنَا عَلَىٰ كُرۡسِيِّهِۦ جَسَدٗا ثُمَّ أَنَابَ

Transliteration: (Wa laqad fatannaa Sulaimaana wa alqainaa 'alaa kursiyyihee jasadan summa anaab)

और बेशक हमने सुलैमान को आज़माया [72] और उनके तख़्त पर एक बेजान जिस्म डाल दिया [73], फिर उन्होंने रुजूअ किया। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 34 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 34

"और बेशक हमने सुलैमान को आज़माया [72] और उनके तख़्त पर एक बेजान जिस्म डाल दिया [73], फिर उन्होंने रुजूअ किया।"

[72] इंशा-अल्लाह न कहने पर इम्तिहान

हज़रत सुलैमान (अलैहिस्सलाम) ने एक मर्तबा इरादा फ़रमाया कि आज रात मैं अपनी बीवियों के पास जाऊँगा ताकि हर एक से मुजाहिद बेटा पैदा हो जो अल्लाह की राह में लड़े, मगर "इंशा-अल्लाह" कहना भूल गए। अंबिया की ज़रा सी भूल-चूक भी उनकी शान के मुताबिक़ आज़माइश बन जाती है ताकि उनके दरजात बुलंद हों।

[73] तख़्त पर बेजान जिस्म

सिर्फ़ एक बीवी के यहाँ हमल ठहरा और एक नाक़िस व बेजान बच्चा पैदा हुआ जिसे लाकर तख़्त पर रख दिया गया। हज़रत सुलैमान फ़ौरन मुतवज्जेह हुए और बारगाहे इलाही में गिड़गिड़ा कर रुजूअ फ़रमाया।

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