कुरान - 38:43 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

43
وَوَهَبۡنَا لَهُۥٓ أَهۡلَهُۥ وَمِثۡلَهُم مَّعَهُمۡ رَحۡمَةٗ مِّنَّا وَذِكۡرَىٰ لِأُوْلِي ٱلۡأَلۡبَٰبِ

Transliteration: (Wa wahabnaa lahoo ahlahoo wa mislahum ma'ahum rahmatan minna wa zikraa li ulil albaab)

और हमने उन्हें उनके अहल-ओ-अयाल अता फ़रमाए और उनके साथ उतने ही और अपनी ख़ास रहमत से [89], और अक़्ल वालों के लिए नसीहत के तौर पर। (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 43 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 43

"और हमने उन्हें उनके अहल-ओ-अयाल अता फ़रमाए और उनके साथ उतने ही और अपनी ख़ास रहमत से [89], और अक़्ल वालों के लिए नसीहत के तौर पर।"

[89] अहल-ओ-अयाल और औलाद की दोबारा अता

अल्लाह तआला ने आपकी अहलिया हज़रत रहमत को दोबारा सेहत व शबाब अता फ़रमाया और आपके फ़ौतशुदा बच्चों को ज़िंदा फ़रमा कर उतनी ही और औलाद अता फ़रमाई, जो आपकी सब्र का अज़ीम बदला था।

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