कुरान - 38:64 सूरह साद अनुवाद, लिप्यंतरण और तफसीर (तफ्सीर).

64
إِنَّ ذَٰلِكَ لَحَقّٞ تَخَاصُمُ أَهۡلِ ٱلنَّارِ

Transliteration: (Inna zaalika lahaqqun takhaasumu Ahlin Naar (section 4))

बेशक यह दोज़ख़ वालों का आपस में झगड़ना यक़ीनी हक़ीक़त है [116]! (अनुवाद — मुफ़्ती अहमद यार ख़ान)

मुफ़्ती अहमद यार ख़ान — सूरह साद आयत 64 तफ़सीर



  • मुफ़्ती अहमद यार ख़ान (तफ़सीर-ए-नईमी)

सूरह साद तफ़सीर - आयत 64

"बेशक यह दोज़ख़ वालों का आपस में झगड़ना यक़ीनी हक़ीक़त है [116]!"

[116] दोज़ख़ियों का बाहमी झगड़ा बरहक़ है

यह मंज़र कोई ख़याली अफ़साना नहीं बल्कि दोज़ख़ियों का यह आपस में झगड़ना, एक दूसरे पर लानत करना और इल्ज़ाम तराशी करना क़तई हक़ और यक़ीनी है जो हुज़ूर ﷺ को वही-ए-इलाही के ज़रिए बताया गया।

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