Transliteration: (Attakhaznaahum sikh riyyan am zaaghat 'anhumul absaar)
"क्या हमने उनका मज़ाक़ उड़ाया था [114], या हमारी आँखें उनसे चूक गई हैं [115]?"
वे अपनी ग़लती और जहालत का एतिराफ़ करेंगे कि हमने नाहक़ उन पाकीज़ा बंदों का मज़ाक़ उड़ाया था, जबकि वे अल्लाह की बारगाह में इज़्ज़त और बुलंदी पा चुके हैं।
या वे सोचेंगे कि क्या वे भी जहन्नम में हैं मगर हमारी नज़रें उन्हें नहीं देख पा रहीं? हक़ीक़त यह होगी कि वे जन्नत की आला नेअमतों में चैन से होंगे।
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